Friday, October 8, 2010

Ek Vishwas



जो सागर में कभी गोता नहीं लगाओगे,
तो जान नहीं पाओगे क्या होती है गहराई
जो तारे छूने की आकांशा ना हो,
तो जान नहीं पाओगे क्या होती है उचाई

जो सीखोगे नहीं अंगारों पर चलना,
तो कैसे जानोगे क्या होता है जलना
जो दिल कभी टूटेगा नहीं,
तो कैसे जानोगे दर्द क्या होता है

साया अंधकार का जब तक छाएगा नहीं,
कैसे जानोगे मद्धम रोशनी का महत्व
जो साहिल पर आकर ही थम गए,
तो नदी के उस पार नहीं जा पाओगे

चाहे आखों में इतनी भी नमी आए,
मंज़िल तुम्हारी धुंदली होने न पाए
अपने नन्हे नन्हे सपनो को जीने दो,
क्यूंकि अंकुर से ही बनते है विशाल पेड़

शायद आज ग्रीष्म की तपती गर्मी है,
पर कल वसंत का रंग भी आयेगा
शायद आज एक भयानक रात है,
पर कल एक नई सुबह फिर आयेगी......


Jo sagar mein kabhi gota nahi lagaoge,
To jaan nahi paoge kya hoti hai gaharai,
Jo taare choone ki aakansha na ho,
To jaan nahi paoge kya hoti hai uchayi.

Jo sikhoge nahi angaro par chalana,
To kaise janoge, kya hota hai jalana.
Jo dil kabhi tutega nahi,
To kaise janoge dard kya hota hai.

Saaya andhakar ka jab tak chayega nahi,
Kaise janoge madham roshni ka mahatva.
Jo sahil par aakar hi tham gaye,
To nadi ke uss par nahi ja paoge.

Chahe aakhon mein kitni bhi nami aye,
Manzil tumhari dhundali hone na paye.
Apne nanhe nanhe sapno ko jeene do,
Kyunki ankur se hi bante hai vishal ped.

Shayad aaj grishm ki tapti garmi hai,
Par kal vasant ka rang bhi ayega.
Shayad aaj ek bhayanak raat hai,
Par kal ek nayi subah phir ayegi…...